माना
कि मौत पर वश नही अपना
पर प्रश्न है कि
क्या जिंदगी सचमुच अपनी है ?
हर नवजात के अस्फुट स्वर
कहते हैं कि ईश्वर
इंसान से निराश नहीं है
हमें जूझना है जिंदगी से
और बनाना है
जिदगी को जिंदगी
इसलिये
मेरे बच्चों
अपनी वसीयत में
देकर तुम्हें चल अचल संपत्ति
मैं डालना नहीं चाहता
तुम्हारी जिंदगी में बेड़ियाँ
तुम्हें देता हूँ अपना नाम
ले उड़ो इसे स्वच्छंद/खुले
आकाश में जितना ऊपर उड़ सको
सूरज की सारी धूप
चाँद की सारी चाँदनी
हरे जंगल की शीतल हवा
और झरनों का निर्मल पानी
सब कुछ तुम्हारा है
इसकी रक्षा करना
इसे प्रकृति ने दिया है मुझे
और हाँ किताबों में बंद ज्ञान
का असीमित भंडार
मेरे पिता ने दिया था मुझे
जिसे हमारे पुरखो ने संजोया है
अपने अनुभवों से
वह सब भी सौंपता हूँ तुम्हें
बाँटना इसे जितना बाँट सको
और सौंप जाना कुछ और बढ़ाकर
अपने बच्चों को
हाँ
एक दंश है मेरी पीढ़ी का
जिसे मैं तुम्हें नहीं देना चाहता
वह है सांप्रदायिकता का विष
जिसका अंत करना चाहता हूँ मैं
अपने सामने अपने ही जीवन में...
11 टिप्पणियाँ:
रचना सागर says
16 जून 2009 2:18 अपराह्न
हाँ
एक दंश है मेरी पीढ़ी का
जिसे मैं तुम्हें नहीं देना चाहता
वह है सांप्रदायिकता का विष
जिसका अंत करना चाहता हूँ मैं
अपने सामने अपने ही जीवन में...
बहुत खूब।
सुषमा गर्ग says
16 जून 2009 2:33 अपराह्न
वसीयत एसी ही होनी चाहिये इसी से वसुधैव कुटुम्बकम होगा।
Vijay Kumar Sappatti says
16 जून 2009 2:54 अपराह्न
bahut sundar abhivyakti ... aur in fact yahi aaj ka sahi nirnay honga ...
badhai aur aabhar...
vijay
दिगम्बर नासवा says
16 जून 2009 4:04 अपराह्न
हाँ
एक दंश है मेरी पीढ़ी का
जिसे मैं तुम्हें नहीं देना चाहता
वह है सांप्रदायिकता का विष
kitnaa दर्द chipa है........... इस vasiyat में.......... लाजवाब लिखा
अभिषेक सागर says
16 जून 2009 5:01 अपराह्न
बहुत अच्छी कविता है, बधाई।
बेनामी says
16 जून 2009 5:12 अपराह्न
Nice Poem, Thanks.
Alok Kataria
रंजना says
16 जून 2009 5:20 अपराह्न
Sahi kaha...
Sundar rachna...
महेन्द्र मिश्र says
16 जून 2009 9:47 अपराह्न
सुन्दर अभिव्यक्ति से लबरेज रचना है . आभार.
राजीव तनेजा says
17 जून 2009 7:54 पूर्वाह्न
समय की ज़रूरत भी यही है.....बढिया रचना...बधाई
राजीव तनेजा says
17 जून 2009 7:55 पूर्वाह्न
समय की ज़रूरत भी यही है.....बढिया रचना...बधाई
लावण्यम्` ~ अन्तर्मन्` says
17 जून 2009 6:47 अपराह्न
एक सुँदर कृति !
- लावण्या
मेरी कवितायें
आक्रोश के स्वर ही कुछ परिवर्तन ला सकते है , इस जड़ समाज में
बुधवार, 8 फरवरी 2012
शनिवार, 12 नवम्बर 2011
नई पीढ़ी तक गीता उसी काव्यगत व भावगत आनन्द के साथ पहुंच सके ......
श्रीमद्भगवत गीता विश्व का अप्रतिम ग्रंथ है !
धार्मिक भावना के साथ साथ दिशा दर्शन हेतु सदैव पठनीय है !
जीवन दर्शन का मैनेजमेंट सिखाती है ! पर संस्कृत में है !
हममें से कितने ही हैं जो गीता पढ़ना समझना तो चाहते हैं पर संस्कृत नहीं जानते !
मेरे ८४ वर्षीय पूज्य पिता प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध जी संस्कृत व हिन्दी के विद्वान तो हैं ही , बहुत ही अच्छे कवि भी हैं , उन्होने महाकवि कालिदास कृत मेघदूत तथा रघुवंश के श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद किये , वे अनुवाद बहुत सराहे गये हैं . हाल ही उन्होने श्रीमद्भगवत गीता का भी श्लोकशः पद्यानुवाद पूर्ण किया . जिसे वे भगवान की कृपा ही मानते हैं .
उनका यह महान कार्य http://vikasprakashan.blogspot.com/ पर सुलभ है . रसास्वादन करें . व अपने अभिमत से सूचित करें . कृति को पुस्तकाकार प्रकाशित करवाना चाहता हूं जिससे इस पद्यानुवाद का हिन्दी जानने वाले किन्तु संस्कृत न समझने वाले पाठक अधिकतम सदुपयोग कर सकें . नई पीढ़ी तक गीता उसी काव्यगत व भावगत आनन्द के साथ पहुंच सके .
प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे . यदि कोई प्रकाशक जो कृति को छापना चाहें , इसे देखें तो संपर्क करें ..०९४२५८०६२५२, विवेक रंजन श्रीवास्तव
धार्मिक भावना के साथ साथ दिशा दर्शन हेतु सदैव पठनीय है !
जीवन दर्शन का मैनेजमेंट सिखाती है ! पर संस्कृत में है !
हममें से कितने ही हैं जो गीता पढ़ना समझना तो चाहते हैं पर संस्कृत नहीं जानते !
मेरे ८४ वर्षीय पूज्य पिता प्रो सी बी श्रीवास्तव विदग्ध जी संस्कृत व हिन्दी के विद्वान तो हैं ही , बहुत ही अच्छे कवि भी हैं , उन्होने महाकवि कालिदास कृत मेघदूत तथा रघुवंश के श्लोकशः हिन्दी पद्यानुवाद किये , वे अनुवाद बहुत सराहे गये हैं . हाल ही उन्होने श्रीमद्भगवत गीता का भी श्लोकशः पद्यानुवाद पूर्ण किया . जिसे वे भगवान की कृपा ही मानते हैं .
उनका यह महान कार्य http://vikasprakashan.blogspot.com/ पर सुलभ है . रसास्वादन करें . व अपने अभिमत से सूचित करें . कृति को पुस्तकाकार प्रकाशित करवाना चाहता हूं जिससे इस पद्यानुवाद का हिन्दी जानने वाले किन्तु संस्कृत न समझने वाले पाठक अधिकतम सदुपयोग कर सकें . नई पीढ़ी तक गीता उसी काव्यगत व भावगत आनन्द के साथ पहुंच सके .
प्रसन्नता होगी यदि इस लिंक का विस्तार आपके वेब पन्ने पर भी करेंगे . यदि कोई प्रकाशक जो कृति को छापना चाहें , इसे देखें तो संपर्क करें ..०९४२५८०६२५२, विवेक रंजन श्रीवास्तव
बृहस्पतिवार, 10 नवम्बर 2011
हो सहकार , तो उद्धार !
हो सहकार , तो उद्धार !
विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर ४८२००८
मो.9425806252
कुछ तुम करो , कुछ हम करें
संग साथ सब बढ़ें !
व्यक्ति हो तो एक हो , समूह में ही शक्ति है
काम बांट कर करें !
कण स्वतंत्र धूल है ,मिलें , सनें और बंधें
मूर्त रूप हम गढ़ें !
बिंदु बिंदु गुम हुये , ढ़ूंढ़ने से न मिलें
मिल गये तो चित्र हैं !
हर्फ हर्फ अर्थ बिन , बस महज हर्फ हैं
संग हुये तो शब्द हैं , वाक्य और निबंध हैं !
अलग हैं तो पृष्ठ हैं , फूंकने से जो उड़ें
किताब क्यूं न हम बनें ?
विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर ४८२००८
मो.9425806252
कुछ तुम करो , कुछ हम करें
संग साथ सब बढ़ें !
व्यक्ति हो तो एक हो , समूह में ही शक्ति है
काम बांट कर करें !
कण स्वतंत्र धूल है ,मिलें , सनें और बंधें
मूर्त रूप हम गढ़ें !
बिंदु बिंदु गुम हुये , ढ़ूंढ़ने से न मिलें
मिल गये तो चित्र हैं !
हर्फ हर्फ अर्थ बिन , बस महज हर्फ हैं
संग हुये तो शब्द हैं , वाक्य और निबंध हैं !
अलग हैं तो पृष्ठ हैं , फूंकने से जो उड़ें
किताब क्यूं न हम बनें ?
बुधवार, 17 अगस्त 2011
जिस रिश्ते की डोर भावना, उससे हजारे ,हमारे अन्ना
अन्ना
विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ विद्युत मण्डल कालोनी रामपुर
जबलपुर
इस पीढ़ी के देश प्रेम के जज्बे का , नाम बने अन्ना
भारत की भावनाओ का , अभिमान बने अन्ना
बापू ने दुनियां को अहिंसा की , राह थी दिखाई ,उसी
सत्य और सत्याग्रह का ,सीधा सा पैगाम बने अन्ना
हमने ही चुना जिनको , वे ही नहीं सुनते जब ,तो
जन मन की भावनाओ का , संग्राम बने अन्ना
सत्तर की उमर में भी ,किसी नौजवां से कम नहीं
निस्वार्थ आंदोलन के लिये , तुम्हें प्रणाम है अन्ना
बहुत कर चुके वो , लोकतंत्र में , देश का दोहन
भ्रष्टतंत्र का शुद्धिकरण है जरूरी, अंजाम हैं अन्ना
घुप अंधेरी रात को , रोशन करने की ताकत है हममें
जनता शमां है, मशाल भी, और सुनहरी शाम हैं अन्ना
गांधी हमारे बापू ,चाचा हैं नेहरू , और टेरेसा बनी मदर
विवेक रंजन श्रीवास्तव
ओ बी ११ विद्युत मण्डल कालोनी रामपुर
जबलपुर
इस पीढ़ी के देश प्रेम के जज्बे का , नाम बने अन्ना
भारत की भावनाओ का , अभिमान बने अन्ना
बापू ने दुनियां को अहिंसा की , राह थी दिखाई ,उसी
सत्य और सत्याग्रह का ,सीधा सा पैगाम बने अन्ना
हमने ही चुना जिनको , वे ही नहीं सुनते जब ,तो
जन मन की भावनाओ का , संग्राम बने अन्ना
सत्तर की उमर में भी ,किसी नौजवां से कम नहीं
निस्वार्थ आंदोलन के लिये , तुम्हें प्रणाम है अन्ना
बहुत कर चुके वो , लोकतंत्र में , देश का दोहन
भ्रष्टतंत्र का शुद्धिकरण है जरूरी, अंजाम हैं अन्ना
घुप अंधेरी रात को , रोशन करने की ताकत है हममें
जनता शमां है, मशाल भी, और सुनहरी शाम हैं अन्ना
गांधी हमारे बापू ,चाचा हैं नेहरू , और टेरेसा बनी मदर
शनिवार, 30 जुलाई 2011
अस्पताल
अस्पताल
विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र
जनसंपर्क अधिकारी एवं अति. अधीक्षण यंत्री ,ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर (मप्र) 482008
मो. 9425806252
जिदंगी कैद है यहां
वेंटीलेटर में।
आक्सीजन सिलेंडर
में भरी है सांसे।
उलटी लटकी है जिदंगी
सिलाइन, ग्लूकोज या खून की बोतलों में
रंग बिरंगे कैप्सूल के चिकने आवरण में
सिमटी हुई है दवा की सारी कडवाहट
जैसे स्वच्छ ओवर कोट में हो पैरा मेडिकल स्टाफ
शुगर कोटेड है टेबलेट्स
किसी सुंदर सी नर्स की मुस्कान की तरह
पर जिदंगी की जद्दोहद बहुत कडवी है
ए.सी. कमरो की दिवारों पर कांच
बडी मंहगी होती है मषीनों में शरीर के भीतर तक जांच
मांस के लोथडे में इंजेक्षन की चुभन
जाने कैसी तो होती है अस्पताल की गंध
धवल सफेद लिबासों में डाक्टर
कुछ बगुले, चंद हंस
गले मे झूलता स्टेथेस्कोप क्या सचमुच सुन पाता है
कितना किसका जिंदगी से नाता है।
विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र
जनसंपर्क अधिकारी एवं अति. अधीक्षण यंत्री ,ओ.बी. 11, एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर (मप्र) 482008
मो. 9425806252
जिदंगी कैद है यहां
वेंटीलेटर में।
आक्सीजन सिलेंडर
में भरी है सांसे।
उलटी लटकी है जिदंगी
सिलाइन, ग्लूकोज या खून की बोतलों में
रंग बिरंगे कैप्सूल के चिकने आवरण में
सिमटी हुई है दवा की सारी कडवाहट
जैसे स्वच्छ ओवर कोट में हो पैरा मेडिकल स्टाफ
शुगर कोटेड है टेबलेट्स
किसी सुंदर सी नर्स की मुस्कान की तरह
पर जिदंगी की जद्दोहद बहुत कडवी है
ए.सी. कमरो की दिवारों पर कांच
बडी मंहगी होती है मषीनों में शरीर के भीतर तक जांच
मांस के लोथडे में इंजेक्षन की चुभन
जाने कैसी तो होती है अस्पताल की गंध
धवल सफेद लिबासों में डाक्टर
कुछ बगुले, चंद हंस
गले मे झूलता स्टेथेस्कोप क्या सचमुच सुन पाता है
कितना किसका जिंदगी से नाता है।
मंगलवार, 28 दिसम्बर 2010
और यह बात बढ़ाई हमने .....
श्रद्धा जैन गजल के सुंदर शब्दो की हमसफर हैं ....उनकी ये पंक्तियां फेस बुक पर ..
कुछ बात तो ज़रूर थी, मिलने के बाद अब तलक
खुद की तलाश में हूँ मैं, लेकिन मेरे निशाँ नहीं
दुश्मन बना जहान ये, ऐसी फिज़ा बनी ही क्यूँ
मेरे तो राज़, राज़ हैं, कोई भी राज़दां नहीं
और यह बात बढ़ाई हमने .....
गुमशुदा कहो ना उसे , मिल ही जायेगा फेस बुक में
वो शख्स भी अपनों सा ही है, कोई शहनशां नहीं
कुछ बात तो ज़रूर थी, मिलने के बाद अब तलक
खुद की तलाश में हूँ मैं, लेकिन मेरे निशाँ नहीं
दुश्मन बना जहान ये, ऐसी फिज़ा बनी ही क्यूँ
मेरे तो राज़, राज़ हैं, कोई भी राज़दां नहीं
और यह बात बढ़ाई हमने .....
गुमशुदा कहो ना उसे , मिल ही जायेगा फेस बुक में
वो शख्स भी अपनों सा ही है, कोई शहनशां नहीं
लेबल:
के सुंदर,
शब्दो की,
श्रद्धा जैन गजल,
हमसफर
रविवार, 19 दिसम्बर 2010
फरमाईश पर कविता लिखने का प्रोग्राम जारी है इस बार......बिगबास
फरमाईश पर कविता लिखने का प्रोग्राम जारी है पिछली पोस्ट पर टिप्पणी में बिगबास की फरमाईश पर बिगबास पर यह रचना...
बिगबास
विवेक रंजन श्रीवास्तव
इस हमाम में सब नंगे हैं दिखलाता यह सच बिगबास
मन की परतो के भीतर की , तह दिखलाता है बिगबास
जनहित याचिकायें भी लग गईं टीआरपी पर बनी हई है
हर कोई जब करे बुराई , कौन देखता फिर बिगबास ?
स्वेता सीमा वीणा अस्मित, किस्मत सबकी लगी दांव पर
प्रश्न यही करते हैं खुद से ,कब तक किसका घर बिगबास
लिये करोड़ों तब आये हैं , करते हैं पर बस बकवास
सट्टा इस पर लगा हुआ है , जीतेगा अब कौन बिगबास
कुछ घर से बाहर हैं हो गये , कुछ कैमरे में कैद हो गये
चौथी बार रंग कलर्स पर , दिखा रहा सीरियल बिगबास
बिगबास
विवेक रंजन श्रीवास्तव
इस हमाम में सब नंगे हैं दिखलाता यह सच बिगबास
मन की परतो के भीतर की , तह दिखलाता है बिगबास
जनहित याचिकायें भी लग गईं टीआरपी पर बनी हई है
हर कोई जब करे बुराई , कौन देखता फिर बिगबास ?
स्वेता सीमा वीणा अस्मित, किस्मत सबकी लगी दांव पर
प्रश्न यही करते हैं खुद से ,कब तक किसका घर बिगबास
लिये करोड़ों तब आये हैं , करते हैं पर बस बकवास
सट्टा इस पर लगा हुआ है , जीतेगा अब कौन बिगबास
कुछ घर से बाहर हैं हो गये , कुछ कैमरे में कैद हो गये
चौथी बार रंग कलर्स पर , दिखा रहा सीरियल बिगबास
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